स्टील उद्योग बंद होने के कगार पर

बद्दी (सोलन)। बिजली की दरों की बढ़ोतरी और कई टैक्स लागू होने से स्टील उद्योग बंद होने के कगार पर हैं। औद्योगिक पैकेज आने पर प्रदेश में 40 स्टील उद्योग आए थे लेकिन वर्तमान में 15 उद्योग बंद हो गए हैं। 25 में से 10 उद्योग बंद होने की कगार पर हैं, वहीं वर्तमान में जो उद्योग चल रहे हैं उन पर बैंकों व अन्य देनदारी चार गुणा बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार पैकेज आने से पहले प्रदेश में बिजली की दरें यूपी और पंजाब से आधी कीमत पर थी लेकिन वर्तमान में यूपी, पंजाब और हिमाचल की बिजली की दरों में कोई अंतर नहीं है। इस वर्ष बिजली की दरों में 17 फीसदी बढ़ोतरी होने से एक उद्योग पर दस लाख रुपये प्रति माह का खर्चा बढ़ गया है। 0.5 फीसदी सीएसटी बढ़ने से तीन लाख रुपये प्रति माह का खर्चा और जुड़ गया है। जिससे लोहा उद्योग की रही सही कसर पूरी हो गई है। लोहा उद्योग में इन कमिंग और आउट गोइंग माल पर ऐडिशनल गुड्स टैक्स (एजीटी) लगने से लोहा उद्योग की कमर पूरी तरह से टूट गई है। देश में इस तरह का टैक्स कहीं पर नहीं है। हिमाचल में कच्चा माल खरीदने व तैयार माल बेचने पर 75 रुपये टन एजीटी देनी पड़ रही है। अगर एक उत्पादक 2 हजार टन माल तैयार करता है तो उसे 4 हजार टन की एजीटी देना पड़ रहा है।
लघु उद्योग भारती के उत्तर भारत के प्रभारी विनोद जैन, प्रदेश अध्यक्ष तेजेंद्र गोयल, लोहा उद्योग संघ के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल जैन, स्टील प्रकोष्ठ के बीबीएन इकाई के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लोह उद्योगों से तीस हजार लोगों को रोजगार दे रहा है। इतने ही लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। इन उद्योगों के बंद होने हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन उद्योगों को चलाए रखने के लिए बिजली की दरों और सीएसटी कम करें। एजीटी एडिशनल गुड्स एक्ट एक साइड ही लगाएं तभी यह उद्योग चल पाएंगे।
उधर उद्योग विभाग के उपनिदेशक तिलक राज ने कहा कि उद्योग संघ का दावा विभागीय आंकड़े से मेल नहीं खाता। उनकी जानकारी में अभी तक महज दो या तीन स्टील उद्योग बंद हुए हैं। दोनों कालाअंब के हैं। एक में प्रबंधन की आपसी कलह और दूसरा उद्योग बैंक के विवाद के चलते बंद हुआ है।

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